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समाजिक क्रान्ति के अग्रदूत संत कबीर की जयंती संग मनी मां गोमती की महाआरती

लखनऊ। ज्येष्ठ पूर्णिमा सोमवार को गोधूलि में गोमती की महाआरती संग मनाई गई कबीर जयंती। प्रत्येक पूर्णिमा को होने वाली महाआरती की श्रृंखला में मनकामेश्वर उपवन तट दीपों से प्रज्जवलित हो उठा। मनकामेश्वर मठ मंदिर की महंत देव्या गिरि महाराज की अगुवाई में हुए महत आयोजन में हजारों श्रृद्धालू सम्मिलित हुए।

goमहाआरती का विहंगम दृश्य- लखनऊ की हृदय रेखा कही जाने वाली मां गोमती की महाआरती कर प्रार्थना व अर्चना की गई। लक्ष्मणपुर पर हमेशा अपनी कृपा मां गोमती बनाए क्योंकि मां जब स्वच्छ व सुंदर बनेगी तभी यहां के निवासियों का जीवन स्वच्छ व स्वस्थ होगा।

भजनों की सरिता संजय दुबे गुरू जी द्वारा पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया, पंडिया भया न कोय। ढाई आक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय। गोमती जय घोष गीत, जै जै मां गोमती, भजनों द्वारा कबीर जी की जयंती मनाई गई। जिसमें शिवांगी शुक्ला, नैन्सी ओमरे के स्वरों से गोमती तट सुर मधुर हो उठा।
धार्मिक सहिष्णुता का रहा संगम- शेन छत सिंह शान जो लोक गायक एवं फिल्म अभिनेता द्वारा हर-हर महादेव शंभू काशी विश्वनाथ गंगे के लगे जयकारे।

वहां उपस्थित भक्तों ने जमकर जयघोष किया। गोमती दर्शन का चरित्र सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए। भगत के प्राण है भोलेनाथ पर सुनते ही तट पर आनंदित हुए श्रृद्धालुओं को देखते ही बना।

कबीर शांति मिशन से जुड़े व पूर्व आईएएस आरके मित्तल व मंदिर की महंत देव्या गिरि जी ने संत कविवर कबीर जी पर पुष्प अर्पित किया। उन्होंने बताया कि कबीर का आविर्भाव ऐसे समय हुआ था। सामाजिक असमानता के चरम पर थी। संत होने से अधिक समाज सुधारक ही थे।

कबीर मठ के आरके मिततल ने कबीर जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्हें तिरस्कृत समाज में जन आंदोलन बताने वाला संत बताया।