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यूपी में अक्टूबर तक रहेगा बिजली संकट

लखनऊ || यूपी में गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली संकट भीषण रूप लेता जा रहा है। बेहतर आपूर्ति का दावा ठोकते आ रहे बिजली कंपनियों के उच्चाधिकारियों की यह पोल खुद पावर कॉरपोरेशन ने खोली है। पावर कॉरपोरेशन कभी भी यह मानने को तैयार नहीं होता कि इस बार भीषण बिजली संकट होगा लेकिन नियामक आयोग में पश्चिम उप्र को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली देने के मामले में दाखिल एक लिखित जवपाब में पावर कॉरपोरेशन ने स्वीकारा कि अक्टूबर माह तक भीषण बिजली संकट के कारण अतिरिक्त बिजली दे पाना असंभव है।

powercutइस पत्र का खुलासा उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने किया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वाणिज्य ने आयोग में जवाब दाखिल किया है। इसमे पावर कॉरपोरेशन ने माना कि इस बार पीक डिमांड के अनुपात में प्रदेश में भीषण बिजली की कमी रहेगी, आने वाले गर्मी के महीने में जहां उपलब्धता लगभग 11 हजार मेगावाट से लेकर 11 हजार पांच सौ मेगावाट रहेगी, वहीं प्रतिबंधित मांग 13 हजार मेगावाट से 13 हजार पांच सौ मेगावाट रहेगी।

इसका साफ मतलब है कि प्रतिबंधित मांग के आधार पर लगभग दो हजार मेगावाट बिजली की कमी प्रदेश में बनी रहेगी। विगत दिनों विद्युत नियामक आयोग की तरफ से परफारमेंस के आधार पर लाईन हानियों के मानक पर अलग-अलग क्षेत्रों का रेगूलेटरी सरचार्ज कम किया गया था। लेकिन पश्चिमांचल कंपनी के लाईन लॉस में सुधार लाने की वजह से वहां सरचार्ज पूर्व की तरह ही 2.84 प्रतिशत वसूलने की इजाजत देते हुए आयोग ने वहां के उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत अधिक बिजली आपूर्ति करने का आदेश दिया गया है।

इस आदेश के बाद पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग में एक लिखित जवाब दाखिल करते हुए कहा कि अक्टूबर 2015 के पहले बिजली संकट से निजात नहीं
मिलेगी इसलिए पश्मिांचल बिजली कंपनी के उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली नहीं दी जा सकती। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन ने नियामक आयोग से अनुरोध किया है कि अनपरा डी व ललितपुर यूनिट से अतिरिक्त बिजली मिलने के बाद ही अक्टूबर 2015 के अंत तक बिजली आपूर्ति में सुधार हो पाएगा।