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गोंडा में 85 सेवानिवृत्त अध्यापकों को डीएम ने किया सम्मानित

गोंडा || शिक्षक ही समाज को शिक्षित करने करते हैं, बच्चों में संस्कार ढालते हैं और हमारे ज्ञान चक्षुओं को खोलने का भी कार्य सम्मानित गुरूजन ही करते हैं। इसलिए गुरूजन कभी सेवानिवृत्त नहीं होते बल्कि समाज को उनकी हमेशा आवश्यकता बनी रहती है। यह विचार डीएम आशुतोष निरंजन ने जिला पंचायत सभागर में सेवानिवृत्त अध्यापकों को सम्मानित करने एवं उनके सेवा देयकों का चेक प्रदान करने के उपरान्त अपने सम्बोधन में व्यक्त किए।

dmजिला पंचायत सभागार में आयोजित सम्मान समारोह का शुभारम्भ डीएम ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया। इसके उपरान्त उन्होने सेवानिवृत्त अध्यापकों को सम्बोधित करते हुए आहवान किया कि वे सभी स्वच्छ भारत मिशन जैसे पुनीत कार्य में जिला प्रशासन से जुड़ें एवं सरकार व प्रशासन की मंशानुरूप कम से कम अपने गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने का संकल्प लें। उन्होने कहा कि गुरू कभी रिटायर नहीं होता।

गुरू की जरूरत किसी न किसी स्तर पर हमेश रही है और आगे भी रहेगी। उन्होने कहा कि अध्यापन जेसा पुनीत और कार्य दुनिया में है ही नहीं। क्योकि गुरूजन देश का भविष्य गढ़ते हैं। इसलिए गुरूजनों को सम्मान होना चाहिए और यहीं उनकी सेवा का प्रतिफल भी है जो हम सब दे सकते हैं। उन्होने सेवानिवृत्त अध्यापकों को आगे भी समाज के बेहतरी और विकास के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आहवान करते हुए कहा कि सरकारी सेवा से निवृत्त होने के बाद भी वे समाज को दिशा देने में अपना सहयोग और समय का सदुपयोग करें तथा अध्यात्म से भी जुड़े जिससे वे स्वस्थ रहें और जीवन पर्यन्त अपने ज्ञान और अनुभव से समाज को अच्छी दिशा दे सकें।

इस अवसर पर बीएसए ड0 फतेह बहादुर सिंह ने सेवानिवृत्त सभी अघ्यापकों को बधाई देते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग व उनकी शिक्षा से कामयाबी हासिल करने वाले सभी विद्यार्थीगण उनके आजीवन ऋण हैं। समान समारोह में डीएम ने प्रमी स्वरूप आठ सेवा निवृत्त अध्यापकों को माला पहनाकर व अंगवस्त्र भेंटकर सम्मािनत किया। सम्मान समारोह में कुल पचासी सेवानिवृत्त अध्यापकों को उनके सेवा देयकों का चेक प्रदान किया गया और सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर वित्त एवं लेखाधिकारी, आनन्द सिंह, खेल शिक्षक संजय सहित सेवा निवृत्त अध्यापकगण उपस्थित रहे।