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उत्तर प्रदेश में गंगा तट पर 3 दिवसीय गौ कथा प्रारंभ

कानपुर : (चौबेपुर) कैथी के निकट ढाखा गाँव में गंगा तट पर स्थित श्री गौरीशंकर महादेव धाम में संगीत मय “गौकथा” आज सायं प्रारंभ हुयी. सर्वप्रथम वाराणसी के सांस्कृतिक दल ‘प्रेरणा कला मंच’ द्वारा ग्रामीण आर्थिक में गाय के महत्व को दर्शाती नाट्य प्रस्तुति “एक नई शुरुआत” का मंच हुआ, जिसके माध्यम से उपस्थित जन समुदाय को सन्देश देने की कोशिश की गई कि किस प्रकार गाय पालन, जैविक खेती,पर्यावरण संरक्षण और आपसी सूझबूझ से गाँव की स्थिति बेहतर बनाया जाना संभव है.

gauनाटक के बाद कथा स्थल पर देसी गाय के विधिवत पूजन और आरती के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ के गौ भक्त और कथा वाचक मोहम्म्द फैज खान द्वारा गौ कथा का शुभारम्भ किया गया. ज्ञातव्य है कि मो. खान रायपुर के महाविद्यालय में प्रवक्ता पद की नौकरी छोड़ विगत 3 वर्ष से देश भर में भ्रमण करते हुए लोगों को गोकथा सुना रहे हैं और उन्हें गो सेवा और गो पालन के लिए प्रेरित कर रहे है. रमजान के दिन में नियमपूर्वक रोजा रखते हुए वे दिन की शुरुआत नमाज से करते हैं और सायं काल मंदिर परिसर में उपस्थित श्रोताओं को लोगों को गो कथा सुना रहे है.

कथा के दौरान ही उन्हों खजूर ग्रहण करके इफ्तार किया. उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा गिरीश पंकज के उपन्यास ‘एक गाय की आत्मकथा’ से मिली। उन्होंने बताया कि इस उपन्यास और “धेनु मानस ग्रन्थ” के अध्ययन से मुझे गाय की महत्ता का पता चला और मैंने स्वयं को ‘गौवंश’ की रक्षा के लिए समर्पित करने का फैसला करके ‘गौ सेवा’ को ही अपना लक्ष्य बना लिया है.

अब तक देश के स्कूलों व अन्य संस्थाओं में गाय की महत्ता पर 200 से अधिक लैक्चर देने के अलावा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में 15 गऊ कथाओं का आयोजन कर चुके मोहम्मद फैज खान का कहना है कि ‘‘गाय सिर्फ हिन्दुओं की ही माता नहीं है बल्कि वेदों के अनुसार वह सबकी माता (विश्व माता) है।’’ उन्होंने कहा योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा गोदुग्ध पान किया तो उनके मुखारविंद से भगवतगीता प्रस्फुटित हुइ , दुर्भाग्य से आज लोग शराब का सेवन करते हैं तो मुख से गाली निकलती है. गो दुग्ध कोई साधारण पेय पदार्थ नहीं है साक्षात् अमृत है.

गाय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गाय का दूध और घी ही नहीं बल्कि गौ मूत्र भी समान रूप से उपयोगी है। गाय के मूत्र से मधुमेह, जोड़ों के दर्द, दमा, टी.बी. आदि 48 रोगों की औषधि बनती है और बाजार में दवा के रूप में एक लीटर गौ मूत्र का मूल्य 500 रुपए तक है. उन्होंने कहा कि गाय पालन की सदियों से चली आ रही परम्परा को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है इससे ग्रामीण आर्थिकी, स्वास्थ्य के साथ साथ पर्यावरण भी समृद्ध होगा.

कथा के पूर्व गो-कथा वाचक मो फैज खान का गौरीशंकर महादेव धाम के अध्यक्ष पं. प्रभुनाथ चौबे ने माल्यार्पण करके अभिनंदन किया तत्पश्चात कथा पीठ पर ‘राम चरित मानस’ और ‘धेनु मानस ग्रन्थ’ का पूजन प. ने किया. इस अवसर पर पं राम जी चौबे, आत्मा दास जी , पं भोला पाण्डेय आदि ने भी वेदों और पुराणों में वर्णित गाय की महिमा पर प्रकाश डाला.

अखिल भारतीय गोरक्षा आन्दोलन के संयोजक पं रुपेश पाण्डेय ने मो फैज़ खान का परिचय कराते हुए ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र किया और कहा कि गाय पर राजनीति नही होनी चाहिए, दरअसल इस तरह की राजनीति की शुरुआत 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजों ने हिन्दू मुसलमानों को बांटने के लिए की थी.

कार्यक्रम संयोजक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने बताया कि शनिवार को कथा के पूर्व आपसी प्रेम और भाईचारे को बढाने का सन्देश देने वाला कठपुलती शो की प्रस्तुति की जायेगी.

कार्यक्रम की व्यवस्था में प्रमुख रूप से ग्राम प्रधान सत्य नारायण सहित गिरिधर गोपाल दीक्षित, राम किशुन निषाद प्रदीप सिंह, शिव मूरत तिवारी, राजकुमार पाण्डेय, घनश्याम सिंह, सूरज पाण्डेय, बनवासी यादव आदि का योगदान रहा.