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अच्छे दिन लाने के लिए मोदी के 10 फ़ॉर्मूले, जानिए क्या है

नई दिल्ली, 29 मई 2014||मोदी कैबिनेट की दूसरी बैठक में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 10 गाइडलाइन्स दिए है जिसे अमल में लाया जा सके | आइए जानते है नरेन्द्र मोदी के 10 फ़ॉर्मूले –
modi cabinet
1. नौकरशाहों का मनोबलः अधिकारियों को सरकार का समर्थन हो, ताकि वे नीतियों को जमीन पर अमली जामा पहना सकें |

2. नए सुझावों का स्वागतः चाहे अधिकारी हो या जनता, सभी एक भारत श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए अपनी राय दे सकते हैं. मंत्री फेसबुक और ट्विटर पर लोगों की राय मांगें. अधिकारी अपने प्लान का ब्लूप्रिंट तैयार कर प्रधानमंत्री या अपने मंत्री से संपर्क करें |

3. शिक्षा, स्वास्थ, पानी, सड़कः अगर बेसिक जरूरतें ही पूरी नहीं होंगी, विकसित देश कैसे बनेगा. इसलिए सरकार को सबसे पहले सभी को शिक्षा, हर गांव-मोहल्ले-शहर को स्वास्थ सुविधा, साफ पेयजल, खेतों में पानी और सुगम यातायात के लिए सड़कें उपलब्ध करानी होंगी.

4. सरकार में पारदर्शिताः करप्शन पूरे देश के लिए चिंता का विषय है. और इसके सुधार की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए. नई सरकार की हर नीति, हर हरकत पूरी तरह से पारदर्शी हो.

5. अंतर मंत्रालय तालमेल के लिए व्यवस्थाः एक मंत्रालय की फाइल दूसरे मंत्रालय में अटकी रहती है. नतीजतन, विकास कार्य ठप्प हो जाते हैं और आरोप शुरू. इसे दूर करने के लिए तमाम मंत्रालयों के बीच तालमेल की एक नई व्यवस्था होगी.

6. जनता का वादा पूरा करने के लिए सिस्टमः जनादेश मिलता है जनता से कुछ वायदे करके. ये तय करना होगा कि जो वायदे किए गए हैं, वे समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं. इसके लिए लगातार घोषणापत्र के बिंदुओं के आधार पर बन रही नीतियों और उनके नतीजों का मूल्यांकन हो.

7. अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशः देश की उम्मीदें बड़ी हैं और ये बढ़ रही हैं. अगर महंगाई कम नहीं होगी, रोजगार के साधन नहीं बढ़ेंगे, जीडीपी की सेहत नहीं सुधरेगी तो यह सब निराशा में बदल जाएगा. पॉलिसी के लेवल पर सुधार कर, पुख्ता निर्णय कर और विकास के कामों में तेजी लाकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाना है |

8. संसाधनों और निवेश के लिए रिफॉर्मः अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए निवेश को बढ़ावा देना होगा. इसकी राह में आए रोड़े हटाने होंगे. इसके साथ ही संसाधनों की लूट रोकने, मगर उनके समुचित इस्तेमाल के लिए भी नीतियों में सुधार करना होगा|

9. तय मियाद के अंदर नीतियों पर अमलः योजनाएं बनती हैं और फिर उनके ऊपर फाइलों का ढेर लग जाता है. आवश्यकता है कि हर काम की एक मियाद तय हो और जवाबदेही निश्चित की जाए. कॉरपोरेट लहजे में कहें तो समय पर सही डिलीवरी पर जोर |

10. सरकारी नीतियों में स्थिरता और निरंतरताः विदेशी निवेशक हों या नौकरशाही, सबको यही डर रहता है कि पता नहीं कब सरकार बदल जाए या पता नहीं कब सरकार की नीति यूटर्न ले ले. यह गलत है. सरकारी नीति न सिर्फ स्पष्ट होनी चाहिए, बल्कि यह दीर्घकालिक और निरंतरता लिए होनी चाहिए, ताकि सबको विजन स्पष्ट हो |