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अखिलेश यादव के प्रयासों से जल्द दूर होगा बिजली संकट : सपा

लखनऊ || राजेन्द्र चैधरी ने कहा है कि समाजवादी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को बिजली संकट से जल्द ही निजात मिल सकेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने स्तर से नई लाइनें और सब स्टेशन बनाने तथा बिजली उत्पादन बढ़ाने में रूचि लेकर समयबद्ध ढंग से सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए हैं। इसके फलस्वरूप अक्टूबर,2016 से गांवो को 16 घंटे तहसील 18-20 घंटे और जिला स्तर पर 22 घंटे एवं मंडल इत्यादि को 24 घंटे बिजली मिल सकेगी।

uttar-pradesh-chief-minister-akhilesh-yadav-134417प्रदेश के किसान और गरीबों के हित की इन योजनाओं से ही उत्तर प्रदेश आदर्श बनेगा। विडंबना है कि विकास के इन प्रयासों में मददगार होने और समर्थन करने के बजाय विपक्षी दल नकारात्मक विरोध की राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछली बसपा सरकार के समय एक यूनिट बिजली का उत्पादन नहीं हुआ। बिजली उत्पादन बढ़ाने के बजाए कर्ज पर बाहर से बिजली लेकर प्रदेश पर 15000 करोड़ रूपए का बोझा डालकर बसपा मुख्यमंत्री सत्ता से बाहर चली गई। उत्तर प्रदेश में बिजली संकट के लिए केन्द्र की भाजपा सरकार भी जिम्मेदार है।

समय से कोयला का पर्याप्त स्टाक न मिलने से कई बिजलीघरों में विद्युत उत्पादन में बाधा पड़ती है। समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार ने अवस्थापना सुविधाओं के विस्तार के साथ बिजली उत्पादन बढ़ाने पर विशेषतया ध्यान दिया। बिजली आपूर्ति पटरी पर लाने के लिए अब बड़े पैमाने पर 766 केवी, 400 केवी, 220 केवी, 132 केवी एवं 33 केवी की लाइनें एवं सब स्टेशन बनाए जा रहे हैं। केवल 33 केवी के 550 से अधिक सब स्टेशन आगामी डेढ़ वर्ष में बन जाएगें।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्पष्ट निर्देश दे रखे है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे के अंदर क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों को बदल दिया जाना चाहिए। इसके लिए पहली बार 500 मोबाइल वैन की व्यवस्था भी की गई है। विभिन्न जनपदों में विद्युतीकरण का कार्य प्राथमिकता से चल रहा है। सामान्य योजना के तहत 14,706 निजी नलकूप और बुंदेलखण्ड पैकेज के तहत 2239 नलकूपों का ऊर्जाकरण किया गया। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्र में सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति हेतु फीडर सेपरेशन का काम हो रहा है।

समाजवादी सरकार ने जब वर्ष 2012 में सत्ता सम्हाली थी तो उस समय वितरण कम्पनियों के संचित घाटे लगभग रू0 32,000 करोड़ के थे। मुख्यमंत्री जी ने विद्युत वितरण कम्पनियों को घाटे से उबारने के लिए वित्तीय पुनर्गठन योजना के तहत रियायतें दी। प्रदेश के इतिहास में ऊर्जा विभाग के बजट में कभी इतनी बढ़ोत्तरी किसी सरकार ने नहीं की। वर्ष 2014-15 में प्रदेश सरकार ने बिजली की परियोजनाओं के लिए रू0 23,928 करोड़ की व्यवस्था की।

वर्ष 2015-16 के बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 25,764 करोड़ रूपए रखे गए हैं। मुख्यमंत्री प्रदेश में विद्युत की मांग औेर आपूर्ति के अंतर को समाप्त करने तथा भविष्य में विद्युत की मांग में होने वाली वृद्धि के लिए आवश्यक विद्युत व्यवस्था हेतु अनेक कदम उठा रहे है। इसके अच्छे परिणाम आने सुनिश्चित हैं।